Pages

मियाँ मल्हार - उमड़ घुमड़ घन गरजे बदरा

Sunday, 16 June 2013

राग - मियाँ मल्हार
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
उमड़ घुमड़ घन गरजे बदरा
कारे का अत ही मोरी डरी
अदी अदी खली खली मा रूम झूम ॥

अंतरा
उमड़ घुमड़ घन गरजे बदरा
चमक चमक चमके बिजलिया
चलत पवन पुरमाये रूम झूम ॥


लिपिबद्ध स्वर
X २ 0 ४
ऩी सा रे सा ऩी सा ऩी ध̣
उ म ड़ घु म ड़ घ न
म̣ प̣ ऩी ध̣ ऩी ऩी सा S सा S रे सा रे प म प
ग र जे S ब द रा S का S रे S का S S S
रे म रे प S प म प म रे म रे प प मनी प
अ त ही मो S री ड री अ दी अ दी ख ली ख ली
ग S S म S रे सा सा
मा S S रू S म झू म
प प प प प प नी ध
उ म ड़ घु म ड़ घ न
म प नी ध नी नी सां S नी नी ध नी नी सां नी सां
ग र जे S ब द रा S च म क च म क च म
नीसां रें नी सां नी नी म प रे म रे प प प म प
के S बि S ज लि या S च ल त प व न पु र
प नीनी सां ग S म रे सा
मा S ये रू S म झू म

0 comments:

Popular Posts