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भूपाल तोडी - अब मन तो कैसे रिझाऊँ

Saturday, 24 March 2018

रचना - व्यास C R
राग - भूपाल तोडी
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
अब मन तो कैसे रिझाऊँ, कछु ना सूझे,
कल ना परे, का से कहूँ ये मोरी बिधा ॥

अंतरा
आस लगी मोहे ताल सुरन की,
भेद ना पायो गुनीदास बिना॥

Prabhakar Karekar performs here on YouTube

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बैरागी भैरव - साँवरिया घर नहीं आये

रचना - व्यास C R
राग - बैरागी भैरव
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
साँवरिया घर नहीं आये, रतिया बिताई,
तरपत सारी उन बिन रोवत रोवत ॥

अंतरा
तुम्हींसो हूँ डारी थी मोरी आन,
मंदिरवा में बेग पधारो,
बिन ‘गुनिजान’ कछुक नहिं भावत॥

Sanjeev Chimmalgi performs here on YouTube

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बैरागी भैरव - सुमिर ले भोर समे

रचना - व्यास C R
राग - बैरागी भैरव
ताल - विलंबित झपताल


स्थायी
सुमिर ले भोर समे राजाराम को,
तब तू पावे साच समाधान रे ॥

अंतरा
माया भरी जगत में जो तुम देखत है,
कछुक नहीं आवे काम ‘गुनिजान’ रे॥

Sanjeev Chimmalgi performs here on YouTube

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श्री - सांझ की बेर

रचना - व्यास C R
राग - श्री
ताल - तीनताल


स्थायी
सांझ की बेर सुमिर हरि नाम,
जो ही सब को करत भव पार ॥

अंतरा
काहे धरे बिरथ अभिमान,
समझ मन सोच नी को बिचार ॥


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