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रघुवर तुमको मेरी लाज

Monday, 24 January 2011

साहित्य-तुलसीदास
चित्रपट - अनकही
संगीत - जयदेव
गायन - भीमसेन जोशी


रघुवर तुमको मेरी लाज ।
सदा सदा मैं शरण तिहारी, तुम हो ग़रीब निवाज ॥

पतित उधारन विरद तिहारो, श्रवन न सुनी आवाज ।
हूँ तो पतित पुरातन कहिये, पार उतारो जहाज ॥१॥

अघ खण्डन दुख भंजन जन के, यही तिहारो काज ।
तुलसीदास पर किरपा कीजे, भक्ति दान देहु आज॥२॥

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चालो चालो सखी

Tuesday, 7 July 2009

साहित्य-तुलसीदास


चालो चालो सखी दरशन करल्यो, चालो
रथ चढ रघुनंदन आवत है|
आर बार मोतियन की झलक है
बिच बिच राम बिराजत है॥

सियाराम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न
हनुमत चवर डुलावत है
मृदंग झांझ पखावज बाजे
नारद बीन बजावत है॥१॥

सुर नर मुनि सब दरशन आये
सखियां मंगल गावत है
तुलसीदास आस सघुवर की
चरण चित्त लागावत है॥२॥

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श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन

Thursday, 21 May 2009

साहित्य - तुलसीदास


श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मनहरण भवभय दारुणम् ।
नवकञ्जलोचन कञ्जमुख करकञ्ज पद कञ्जारुणम् ॥१॥

कंदर्प अगणित अमित छबि नव नील नीरज सुन्दरम् ।
पटपीत मानहु तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरम् ॥२॥

भजु दीनबन्धु दिनेश दानवदैत्यवंश निकन्दनम ।
रघुनन्द आनंदकंद कोशलचंद दशरथ नन्दनम् ॥३॥

सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणम ।
आजानुभुज शरचापधर संग्राम जित खरदूषणम् ॥४॥

इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मनरञ्जनम ।
मम हृदयकञ्ज निवास कुरु कामादि खलदलमञ्जनम् ॥५॥

मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर साँवरो ।
करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो ॥६॥

एहि भाँति गौरि असीस सुनि सिय सहित हियँ हरषी अल ।
तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली॥७॥

सो. – जानि गौरि अनुकूल रिय हिय हरषु न जाइ कह ।
मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे॥८॥

॥ सियावर रामचन्द्र की जय ॥

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