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मियाँ मल्हार - बिजुरी चमके बरसे मोहरवा

Saturday, 24 March 2018

राग - मियाँ मल्हार
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
बिजुरी चमके बरसे,
मेहरवा आई बदरिया,
गरज गरज मोहे अतही डरावे ॥

अंतरा
गर गरजे घन बिजली चमके,
पपीहा पिहू पिहू टेर सुनावे,
का करूं कित जाऊं,
मोरा जियरा तरसे ॥

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मियाँ मल्हार - करीम नाम तेरो

रचना - नियामत ख़ान 'सदारंग'
राग - मियाँ मल्हार
ताल - एकताल


स्थायी
करीम नाम तेरो,
तू साहेब करतार सतार ॥

अंतरा
दुःख जलद दूर कीजे, सुख देवो सबन को,
'सदारंग' बिनति करतार, सुरती ले हो सतार ॥

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मियाँ मल्हार - उमड़ घुमड़ घन गरजे बदरा

Sunday, 16 June 2013

राग - मियाँ मल्हार
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
उमड़ घुमड़ घन गरजे बदरा
कारे का अत ही मोरी डरी
अदी अदी खली खली मा रूम झूम ॥

अंतरा
उमड़ घुमड़ घन गरजे बदरा
चमक चमक चमके बिजलिया
चलत पवन पुरमाये रूम झूम ॥


लिपिबद्ध स्वर
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ऩी सा रे सा ऩी सा ऩी ध̣
ड़ घु ड़
म̣ प̣ ऩी ध̣ ऩी ऩी सा S सा S रे सा रे
जे S रा S का S रे S का S S S
रे रे S रे रे नी
ही मो S री री दी दी ली ली
S S S रे सा सा
मा S S रू S झू
नी
ड़ घु ड़
नी नी नी सां S नी नी नी नी सां नी सां
जे S रा S
नीसां रें नी सां नी नी रे रे
के S बि S लि या S पु
नीनी सां S रे सा
मा S ये रू S झू

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मियाँ मल्हार - अत धूम धूम धूम

Tuesday, 4 June 2013

रचना - क़ुतुब बक्ष 'तानरस ख़ान'
राग - मियाँ मल्हार
ताल - द्रुत एकताल


स्थायी
अत धूम धूम धूम
अत आयी बदरीया
उमड़ घुमड़ गरज गरज
बरसन को लागी ॥

अंतरा
पी पी करत पपीहा
तरसन लागे मोरा जियरा
'तानरस ख़ान'
ओ मोरे डिंगवा ॥

लिपिबद्ध स्वर
x 0 0
रे
ऩी S ध̣ ऩी S ऩी सा S सा S ऩी
धू S धू S धू S S
रे S S रे S सा रे
S S यी S रि या S
नी नी सां नी सां नी सां
ड़ घु
नी रें सां नी रे S सा S
को S S गी S
S S नी नी सां नी सां S
पी S पी S पी S हा S
नी नी सां सां नीरें सां S नी
ला गे मो रा S जि रा
S रे नी नी नी सां S
- ता S ख़ा S आS S S
रें सां नी रे सा S S
- मो रे डिं वा S S S

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