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साजन सुध ज्यूँ जाणे त्यूँ लीजै हो

Tuesday, 7 July 2009

साहित्य-मीराबाई


साजन सुध ज्यूँ जाणे त्यूँ लीजै हो ॥

तुम बिन मेरे और न कोई,
क्रिपा रावरी कीजै हो ॥१॥

दिवस न भूख रैन नहीं निंदरा,
यूँ तन पलपल छीजै हो ॥२॥

मीरा कहे प्रभु गिरधर नागर,
मिल बिछुऱन नहीं कीजे हो ॥३॥

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आली म्हाने लागे वृंदावन नी को

साहित्य-मीराबाई


आली, म्हांने लागे वृंदावन नीको
घर घर तुलसी ठाकुर पूजा
दरसण गोविंदजी को॥

निरमल नीर बहत जमुना में
भोजन दुध दही को
रतन सिंहासन आप बिराजैं
मुकुर धरयो तुलसी को॥१॥

कुंजन कुंजन फिरत राधिका
सबद सुनत मुरली को
मीरा के प्रभू गिरधर नागर
भजन बिना नर फीको ॥२॥


म्हांने=मुझे
फीको = नीरस,व्यर्थ

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मै तो दर्द दीवानी

साहित्य-मीराबाई


मै तो दर्द दीवानी |
मेरा दर्द न जाने कोय॥

घायल की गति घायल जाने
जो कोई घायल होय
जौहरकी गति जौहर जाने
की जिन जौहर होय॥१॥

सूली ऊपर सेज हमरी
सोवन किस बिध होय
गगन मण्डल पर सेज पिया की
किस बिध मिलन होय॥२॥

दर्द की मारी बन बन डोलूँ
बैद मिल्या न कोय
मीरा के प्रभू पीऱ मिटेगी
बैद साँवरिया होय॥३॥

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तुम बिन मोरे कौन खबर ले

साहित्य-मीराबाई


तुम बिन मोरे कौन खबर ले |
गोवर्धन गिरिधारी रे॥

मोर मुकुट पीतांबर सोहे
कुण्डल की छबि न्यारी रे॥१॥

भरी सभा मे द्रौपदि ठाड़ी
राख्यो लाज हमारी रे॥२॥

मीरा के प्रभू गिरिधर नागर
चरण कमल बलिहारी रे॥३॥

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नटवर नागर नंदा

साहित्य-मीराबाई


नटवर नागर नंदा
भजो रे मन गोविंदा |
श्याम सुंदर मुख चंदा
भजो रे मन गोविंदा |
तू ही नटवर, तू ही नागर
तू ही बाल मुकुंदा ॥

सब देवन मे कृष्ण बड़े हैं
जूँ तारा बिच चंदा
सब सखियन मे राधाजी बड़ी है
जूँ नदियाँ बिच गंगा ॥१॥

ध्रुव तारे प्रह्लाद उभारे
नरसिंह रूप धरंता
कालीदह मे नाग जो नाथ्यो
फण फण निरत करंता ॥२॥

वृंदावन मे रास रचायो
नाचत बाल मुकुंदा
मीरा के प्रभु गिरधर नागर
काटो यम का फ़ंदा ॥३॥

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