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तोडि - भवानी जगत जननी

Tuesday, 2 July 2013

रचना - तानसेन
राग - तोडि
ताल - द्रुत एकताल


स्थायी
भवानी जगत जननी
दायिनी सुख कारिनी (/ धारिनी दुःख हारिनी)
मुझको तू आधार ॥

अंतरा
स्मरत तव चरण युगल
पाप ताप शमन होत
'तानसेन' गात नाम
दिवस यामिनी ॥

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वृंदावनी सारंग - तुम रब तुम साहेब

Thursday, 13 September 2012

रचना - तानसेन
राग - वृंदावनी सारंग
ताल - विलंबित झपताल/सूलताल


स्थायी
तुम रब तुम साहेब
तुम ही करतार
घटा-घटा पूरन
जल-थल भर भार ॥

अंतरा
तुम ही रहीम
तुम ही करीम
गावत गुनी-गंधर्व
सुर-नर सुर-नार ॥१॥

तुम ही पूरन ब्रह्म
तुम ही अचल
तुम ही जगत गुरु
तुम ही सरकार ॥२॥

कहे मियाँ तानसेन
तुम ही आप
तुम ही करत सकल
जग को भव पार ॥३॥

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