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बागेश्री - कौन करत तोरी बिनत

Wednesday, 20 April 2016

राग - बागेश्री
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
कौन करत तोरी बिनत पियरवा,
मानो ना मानो हमरी बात ॥

अंतरा
जब से गयो मोरी सुध-बुध लीनी,
चाहे सौतन के घर जात ॥

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बागेश्री - ढूंढी ढूंढी बाट बाट

राग - बागेश्री
ताल - द्रुत एकताल


स्थायी
ढूंढी ढूंढी बाट बाट,
अमरय्यन की मोरे नंदलाल,
तोरे कारन ॥

अंतरा
थक गये अब हमरे पाँव,
रात हो गयी अपार,
सूझ बूझ तोरे न कैसे, का करूँ दय्या ॥

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बागेश्री - चलत चलत मथुरा नगरी में

राग - बागेश्री
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
चलत चलत मथुरा नगरी में,
श्याम काम जिया में बसेरा,
नंद दिखाये छैला छबीला ॥

अंतरा
बिंदिराबन में फूल फुलेरा,
गोकुल का ये राज दुलारा ॥

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बागेश्री - बिनती सुनो मोरी

राग - बागेश्री
ताल - विलंबित झपताल


स्थायी
बिनती सुनो मोरी, अवधपुर के बसैय्या,
तुम बिन कवन मोरे, दुख के हरैय्या ॥

अंतरा
जहाँ जहाँ पऱी बीर, तहाँ तहाँ दियो धीर,
जानकी पती राम, भव के तरैय्या ॥

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