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भैरव - हम से करत तुम रार बालम

Saturday, 13 June 2015

राग - भैरव
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
हम से करत तुम रार बालम,
छोडो़ मोरी बैय्यां ॥

अंतरा
सगरी रैन मोरे तड़पत बीती,
तुम बिन कछु नाही सुहावे॥

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भैरव - बालमवा मोरे सैय्याँ

Tuesday, 4 June 2013

रचना - नियामत ख़ान 'सदारंग'
राग - भैरव
ताल - विलंबित एकताल


स्थायी
बालमवा मोरे सैय्याँ 'सदारंगीले' ॥

अंतरा
हूँ तो तुम बिन तरस गयीली
दरस बेग दिखाओ
ले हो बलय्याँ ॥

Pandit Dr.Nagaraja Rao Havaldar performs :

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भैरव - नाम करी मैं तो

राग - भैरव
ताल - विलंबित झपताल


स्थायी
नाम करी मैं तो
लेत मन भोरी
तब होवे निस्तार
दोवू जगत में ॥

अंतरा
कैसे हो मूँ से काला
आशा करत होवे
सिवा उसके और कौन
दोवू जगत में ॥

लिपिबद्ध स्वर
x 0
मग मग मप
ना S S री S मैं S तो
रे रे रे सा रे रे रे सा
ले S भो S S S री
सा रे नी नी सां
हो S वे नि S स्ता S
सांध धनीसां मप मग मग मप
दो S वू S में S S
नी नी सांनी सांनी सांसां
कै S से S हो मूँ से का S ला
सां नीनी सांनी सां रें नी सां
S शा S हो S वे
मग मग नी नी सां
सि वा S स्के कौ S
सांध धनीसां मप मग मग मप
दो S वू S में S S

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भैरव - जागो मोहन प्यारे

राग - भैरव
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
जागो मोहन प्यारे तुम
साँवरी सूरत तोरा मन ही भावे
सुंदर श्याम हमारे॥

अंतरा
प्रातः समय उठी भानोदय भयो
ग्वाल बाल सब भूपती आवे
तुम्हरे दरसवा को द्वारे ठाड़े
उठी उठी नंदकिशोर ॥

लिपिबद्ध स्वर
x 0
जा S गो S मो S
रे
प्या S रे S S S तु साँ री सू तो रा
रे रे S सा S ऩी सा
ही S भा S वे S सुं S श्या S
सां सां मप मग
मा S S S S S रे S
प्रा S तः ठी
सां सां सां सां सां नी रे सां सां नी नी नी नी रे सां
भा S नो S यो ग्वा S बा S
सां सां नी सां नीसां रेंसां नी
भू S ती S वे S तु म्ह रे वा को
रे रे रे सा सा ऩी सा
द्वा S रे S ठा S ड़े S ठी ठी नं S कि
सां सां मप मग
शो S S S S S S


Pandit Dr.Nagaraja Rao Havaldar performs (drut khayal begins 22:10):

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भैरव - तोरे नगरिया चल बसिया पिया

राग - भैरव
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
तोरे नगरिया चल बसिया पिया
बाबुल के देस ना रहूँगी ॥

अंतरा
जो हम से कछु भूल भयो है
राखूँगी अपनी साथ
सास ननद की गारी सहूँगी॥

लिपिबद्ध स्वर
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सा S
तो रे S रि या S
रे रे सा S सा S S S
सि या S पि या बा S बु के S दे S
गम रे S सा S
ना S S हूँ S गी S
S S
जो S से S छु
सां सां सां सां नी रें सां S S S सां S सां सां
भू S यो S है S रा S खूँ S गी S
नी सां नी सां नीसां रेंसां सां
नी S S S सा S S सा S की S
गम रे S सा S
गा S री हूँ S गी S

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भैरव - धन धन मूरत कृष्ण मुरारी

राग - भैरव
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
धन धन मूरत कृष्ण मुरारी
सुलछ्छन गिरिधारी
छबी सुंदर लागे अति प्यारी ॥

अंतरा
बँसीधर मनमोहन सुहावे
बलबल जाऊँ मोरे मन भावे
सबरंग ग्यान बिचारी ॥

लिपिबद्ध स्वर
x 0
पम
मू S
रे S रे S सा S सा ध̣ S ऩी S ऩी सा सा
कृ S ष्ण मु रा S री S सु S छ्छ S गि रि
रे S सा S सा रे नी नी सां S
धा S री S बि सुं S ला S गे S ति
गम नीसां रेंसां नीसां नी मग
प्या S S S S S री S
S S नी नी
बं S सी S
सां सां सां सां नी रे सां S नी सां गं मं रे S सां S
मो सु हा S वे S जा S ऊँ S
नी धं नी सां धं S S S
मो रे भा S वे S रं ग्या S बि
गम पध नीसां रेंसां नीसां नीध मग
चा S S S S S री S

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