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मियाँ मल्हार - करीम नाम तेरो

Saturday, 24 March 2018

रचना - नियामत ख़ान 'सदारंग'
राग - मियाँ मल्हार
ताल - एकताल


स्थायी
करीम नाम तेरो,
तू साहेब करतार सतार ॥

अंतरा
दुःख जलद दूर कीजे, सुख देवो सबन को,
'सदारंग' बिनति करतार, सुरती ले हो सतार ॥

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श्री - सांझ भई

रचना - नियामत ख़ान 'सदारंग'
राग - श्री
ताल - एकताल


स्थायी
सांझ भई, अजहूँ नहीं आये,
गौवन के प्रतिपाल चरवाल चरैय्या ॥

अंतरा
हाथ बंसी धर, मुकुट सीस साजे,
‘सदारंग’ कर रूप सरूप अंगवा ॥


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बिहाग - टेर सुने पिया की आवन की

Wednesday, 20 April 2016

रचना - नियामत ख़ान 'सदारंग'
राग - बिहाग
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
टेर सुने पिया की आवन की,
सुध बिसरायी मेरे मन की ॥

अंतरा
जब ही मिलत मोरे आन ‘सदारंग’,
तब ही होत सखी मेरे मन की ॥

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बिहाग - कैसे सुख सोवे

रचना - नियामत ख़ान 'सदारंग'
राग - बिहाग
ताल - विलंबित एकताल


स्थायी
कैसे सुख सोवे नींदरिया,
श्याम सूरत चित चढ़ी ॥

अंतरा
सोय सोय ‘सदारंग’ अकुलाये,
या विधि गाँठ पड़ी ॥

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नट मल्हार - आज न को भयी

रचना - नियामत ख़ान 'सदारंग'
राग - नट मल्हार
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
आज न को भयी मिलना उसी से,
घरवाले लोगवा जा के ॥

अंतरा
मन रंग लिये नयी रुचि गाये,
तब तो ‘सदारंग’ निरखे ॥

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नट मल्हार - लागी लागी तेरो नैन

रचना - नियामत ख़ान 'सदारंग'
राग - नट मल्हार
ताल - विलंबित तीनताल


स्थायी
लागी लागी तेरो नैन,
बान मेरो खेले जा पर ॥

अंतरा
एक घड़ी एक दिन,
हो रहे ‘सदारंग’ ना ए घर ॥

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तोडि - बाजो री मुहमद सा

रचना - नियामत ख़ान 'सदारंग'
राग - तोडि
ताल - विलंबित तीनताल


स्थायी
बाजो री मुहमद सा धर अनत बधावर,
पूछे मन चित काजे ॥

अंतरा
तन मन धन पाईल, सजनी,
‘सदारंग’ घर राख राख रज ॥

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आहिर भैरव - मन रंगीले

Thursday, 11 June 2015

रचना - नियामत ख़ान 'सदारंग'
राग - आहिर भैरव
ताल - विलंबित एकताल


स्थायी
मन रंगीले, ये सवेरा, नैना सुख दायिये ॥

अंतरा
'सदारंगीले' सुहाग सब से सुख दायिये ॥

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तोडि - चंगे नैनवालिया

Tuesday, 2 July 2013

रचना - नियामत ख़ान 'सदारंग'
राग - तोडि
ताल - विलंबित एकताल


स्थायी
चंगे नैनवालिया कुड़िया
'सदारंग'नू देंदिया सेनत ॥

अंतरा
मुख चंदा सा और गुलबदनिया
मुख से बनावत बेन ॥

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तोडि - दय्याँ बट डूबर भयी

Tuesday, 4 June 2013

रचना - नियामत ख़ान 'सदारंग'
राग - तोडि
ताल - विलंबित एकताल


स्थायी
दय्याँ बट डूबर भयी
मैं का लंगरवा भरन देत ना गगरिया ॥

अंतरा
कैसे मैं जाऊँ विहान तोरे संग री सजनी
प्रीतम ठाड़ो ‘सदारंग’ उचकैय्या ॥

Pandit Ramasheya Jha 'Ramarang' version that has the sam on the pancham

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भैरव - बालमवा मोरे सैय्याँ

रचना - नियामत ख़ान 'सदारंग'
राग - भैरव
ताल - विलंबित एकताल


स्थायी
बालमवा मोरे सैय्याँ 'सदारंगीले' ॥

अंतरा
हूँ तो तुम बिन तरस गयीली
दरस बेग दिखाओ
ले हो बलय्याँ ॥

Pandit Dr.Nagaraja Rao Havaldar performs :

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