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दिल में इक लहर सी उठी है अभी

Thursday, 14 November 2013

साहित्य - नासिर क़ाज़मी


दिल में इक लहर सी उठी है अभी ।
कोई ताज़ा हवा चली है अभी ॥

शोर बरपा है ख़ाना-ए-दिल में ।
कोयी दीवार सी गिरी है अभी ॥१॥

कुछ तो नाज़ुक़ मिज़ाज हैं हम भी ।
और यह चोट भी नयी है अभी ॥२॥

भरी दुनिया में जी नहीं लगता ।
जाने किस चीज़ की कमी है अभी ॥३॥

तू शरीक़-ए-सुखन नहीं है तो क्या ।
हम-सुखन तेरी खामोशी है अभी ॥४॥

याद के बे-निशाँ जज़ीरों से ।
तेरी आवाज़ आ रही है अभी ॥५॥

शहर की बे-चिराग़ गलियों में ।
ज़िन्दग़ी तुझको ढूँढती है अभी ॥६॥

सो गये लोग उस हवेली के ।
एक खिड़की मगर खुली है अभी ॥७॥

वक़्त अच्छा भी आएगा 'नासिर' ।
ग़म न कर ज़िन्दग़ी पड़ी है अभी ॥८॥



Audio Links : Ghulam Ali, Ghulam Ali

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उठत जिया हूक सुनी कोयल कूक

Monday, 21 October 2013

रचना - श्रीकृष्ण नारायण रतनजानकर
राग - बसंत मुखारि
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
उठत जिया हूक सुनी कोयल कूक,
बिरहा अगन झरी,
रैन-दिन नहीं चैन पड़े मोरी, का री करूँ ॥

अंतरा
लगन लगी मिलवे को चाहे,
जिया नहीं मानत,
निस-दिन नीर झरत नैनन सों, का री करूँ ॥

Smt. Malini Rajukar performs :

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याद पिया की आये

Saturday, 5 October 2013

राग - भिन्न शड्ज पर आधारित
ताल - जत



याद पिया की आये
यह दुःख सहा ना जाये, हाये राम

बाली उमरिया सुनरी सजनिया
जोबन बीता जाये, हाये राम

बैरी कोयलिया कूहूक सुनाये
मुझ बिरहन जिया जलाये
पी बिन रहा ना जाये, हाये राम

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आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक

साहित्य - मिर्ज़ा ग़ालिब


आह को चाहिए एक उम्र असर होने तक ।
कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक ॥

दाम हर मौज मे है, हल्क़ा-ए-सद-काम-ए-नहंग ।
देखें क्या गुज़रे है क़तरे पे गौहर होने तक ॥१॥

आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बेताब ।
दिल का क्या रंग करूँ ख़ून-ए-जिगर होने तक ॥२॥

हम ने माना कि तग़ाफ़ुल ना करोगे लेकिन ।
ख़ाक हो जाएँगे हम तुम को ख़बर होने तक ॥३॥

परतव-ए-ख़ुर से है शबनम को फ़ना की तालीम ।
मैं भी हूँ एक इनायत की नज़र होने तक ॥४॥

यक नज़र बेश नहीं फ़ुर्सत-ए-हस्ती, ग़ाफ़िल ।
गर्मी-ए-बज़्म है एक रक़्स-ए-शरर होने तक ॥५॥

ग़म-ए-हस्ती का ‘असद’ किस से हो जुज़ मर्ग इलाज ।
शमा हर रंग में जलती है सहर होने तक ॥६॥


सर होना = conquer, tame
ज़ुल्फ़ के सर होना = tame the curls of hair
दाम [Prk. दामं; S. दाम (base दामन्), rt. दा 'to bind'], = A rope, cord, string; a fetter... here, a net
दाम हर मौज मे = A net in every wave
नहंग = a crocodile,a water dragon or other similar monster
काम-ए-नहंग = action of crocodile
हल्क़ा-ए-सद = hundred chains
हल्क़ा-ए-सद-काम-ए-नहंग = hundred lines of crocodiles/monsters in vile action
गौहर = pearl
सब्र-तलब = needing/demanding patience
ख़ून-ए-जिगर = devastation with pain
तग़ाफ़ुल = ignore
खुर - sun
परतव - rays
परतव-ए-ख़ुर - sun rays
शबनम - dew
फ़ना = self-destruction
इनायत की नज़र = merciful glance
बेश = lot, too much
फ़ुर्सत-ए-हस्ती = Duration Of Life
ग़ाफ़िल = negligent (here, addressing the muse)
गर्मी-ए-बज़्म = Warmth of the gathering/party
रक़्स-ए-शरर = Dance of the spark
ग़म-ए-हस्ती = sorrows of life
जुज़ = besides, except, other than
मर्ग = death
शमा = candle
सहर = Dawn/Morning

Audio Links : Ghulam Ali, Jagjit Singh, Jagjit Singh, Ustad Barkat Ali Khan
Analysis here

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हम ने एक शाम चिराग़ों से सजा रखी है

Tuesday, 17 September 2013

साहित्य - ताहिर फ़राज़
संकलन - काश
गायन - हरिहरन


हम ने एक शाम चिराग़ों से सजा रखी है ।
शर्त लोगों ने हवाओँ से लगा सखी है ॥

हम भी अंजाम की परवाह नही करते यारो ।
जान हम ने भी हथेली पे उठा रखी है ॥१॥

शायद आ जाये कोई हम से ज़्यादा प्यासा ।
बस यही सोचके थोड़ी बचा सखी है ॥२॥

तुम हमें क़त्ल तो करने नहीं आये लेकिन ।
आस्तीनों में यह क्या चीज़ छुपा सखी है ॥३॥

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काश ऐसा कोई मंज़र होता

साहित्य - ताहिर फ़राज़
संकलन - काश
गायन - हरिहरन


काश ऐसा कोई मंज़र होता ।
मेरे कांधे पे तेरा सिर होता ॥

जमा करता जो में आये हुए संग ।
सिर छुपाने के लिये घर होता ॥१॥

इस बुलंदी पे बहुत तन्हा हूँ ।
काश मैं सब के बराबर होता ॥२॥

उसने उलझादिया दुनिया में मुझे ।
वरना एक और क़लंदर होता ॥३॥

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बंगरी मोरी मुरक गई छांडो

Monday, 16 September 2013

राग - मारवा
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
बंगरी मोरी मुरक गई छांडो ना बैया,
तोरी काकीली चोरी लंगरवा,
हसत खेलत कीन्ही मो से बरजोरी ॥

अंतरा
संग के सहेलिया लुभाय गाईयॉं,
वह तो दूर दूर निकसो जात ॥

Audio Link : Bhimsen Joshi

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गुरु बिन ज्ञान ना पावे

राग - मारवा
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
गुरु बिन ज्ञान ना पावे
मन मूरख काहे सोच सोच पछतावे ॥

अंतरा
सदगूरु की संगत कर रे
सब गुनयन में गुनी कहावे ॥

लिपिबद्ध स्वर
X 0
ध̣सा सा ध̣सा ऩी रे
गु रु बि S
ऩी S ध̣ S ध̣ S ध̣ ऩीरे रे S ऩीध̣ सा सा ऩीध̣ ऩी ऩी
ज्ञा S S S S ना S पा S वे मू S
ध̣ S ऩी ध̣ ऩीध̣ रे रे म́ म́ग रे गम́ म́
S का S हे S सो S S S सो S S
S म́ध म́ग रे म́ध म́ग रेसा ऩीध̣ साऩी रे
S ता S S S S S S वे S
म́ सां S सां
गु S रु
सां S सां S सां सां सां नीध रेंनी रें S रें रें रे S S
की S सं S रे S S S S S
ऩीरे नीध̣ S S ध̣ ऩी रे म́ S S म́ S S
S S S S गु नि में S S गु नी S S
म́ध म́ग रे म́ध म́ग रेसा ऩीध̣ साऩी रे S सा
हा S S S S S S S वे S S

Audio links : Bhimsen Joshi

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कृष्णाष्टकम्

Wednesday, 28 August 2013

वसुदेवसुतम् देवम् कंसचाणूरमर्दनम् ।
देवकी परमानन्दम् कृष्णम् वन्दे जगद्गुरुम् ॥१॥

अतसी पुष्पसङ्काशम् हार नूपुर शोभितम् ।
रत्नकङ्कणकेयूरम् कृष्ण्म् वन्दे जगद्गुरुम् ॥२॥

कुटिलालक संयुक्त्म् पूर्णचन्द्रनिभाननम् ।
विलसत् कुण्डलधरम् कृष्ण्म् वन्दे जगद्गुरम् ॥३॥

मन्दारगन्धसंयुक्तम् चारुहासम् चतुर्भुजम् ।
बर्हिपिंछावचूडाङ्गम् कृष्णम् वन्दे जगद्गुरुम् ॥४॥

उत्फुल्लपद्मपत्राक्षम् नीलजीमूतसन्निभम् ।
यादवानाम् शिरोरत्नम् कृष्णम् वन्दे जगद्गुरुम् ॥५॥

रुक्मिणीकेलिसंयुक्तम् पीताम्बरसुशोभितम् ।
अवाप्त तुलसीगन्धम् कृष्णम् वन्दे जगद्गुरुम् ॥६॥

गोपिकानाम् कुचद्वन्दकुङ्कुमाङ्कितवक्षसम् ।
श्रीनिकेतम् महेष्वासम् कृष्णम् वन्दे जगद्गुरुम् ॥७॥

श्रीवत्साङ्कम् महोरस्कम् वनमाला विराजितम् ।
शङ्खचक्रधरम् देवम् कृष्णम् वन्दे जगद्गुरुम् ॥८॥

कृष्णाष्टकमिदम् पुण्यम् प्रातरुत्थाय यः पठेत् ।
कोटिजन्मकृतम् पापम् स्मरणेन विनश्यति ॥

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నిన్న లేని అందమేదో నిదుర లేచెనెందుకో

Tuesday, 27 August 2013

సాహిత్యం - సీ.నారాయణరెడ్టి
చిత్రం-పూజాఫలం (౧౯౬౪)
సంగీతం-సాలూరి రాజేశ్వర రావు
గాయనం-ఘంటసాల వెంకటేశ్వర రావు


నిన్న లేని అందమేదో నిదుర లేచెనెందుకో ॥

తెలియరాని రాగమేదో తీగె సాగెనెందుకో
నాలో .. నిన్న లేని అందమేదో నిదుర లేచెనెందుకో ॥

పూచిన ప్రతి తరువొక వధువు
పూవు పూవున పొంగెను మధువు
ఇన్నాళ్లీ శోభలన్నీ ఎచట దాగెనో ॥౧॥

చెలి నురుగులె నవ్వులు కాగా
సెలయేరులు కులుకుచు రాగా
కనిపించని వీణలేవో కదలి మ్రోగెనే ॥౨॥

పసిడి అంచు పైట జార
పయనించే మేఘ బాల
అరుణ కాంతి సోకగానే పరవశించెనే ॥౩॥

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दुर्गा - मनमोहन मुरलीवाला

Saturday, 10 August 2013

राग - दुर्गा
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
मनमोहन मुरलीवाला
मुरलीवाला सखी है काला ॥

अंतरा
निस दिन जागो ध्यान धरत हे
मुनि निगमागम गुनी गावत हे
जित जैय्यो उत हम देखत है
सीस मुकुट गले वनमाला ॥

लिपिबद्ध स्वर
X 0
S S रे सा
मो S मु ली S
रे ध̣ सा S S S सा सा रे
वा S ला S S S मु ली S वा S ला S खी
पम S
है S का S ला S
S सां
नि दि जा S गो S
सां S सां सां रें सां S सां सां सां S रें रें
ध्या S है S मु नि नि मा S
सां रें सांरें सां S S पध
गु नी गा S है S जि जै S य्यो S
रे सा रे ध̣ सा S सा मरे पम धप सां सां
दे S हे S सी S मु कु ले
सां धसां रेंसां धसां धप
मा S ला S S S

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ನೀನೆ ದಯಾಳೋ ನಿರ್ಮಲಚಿತ್ತ ಗೋವಿಂದ

Wednesday, 31 July 2013

ಸಾಹಿತ್ಯ-ಪುರಂದರದಾಸ


ನೀನೇ ದಯಾಳೋ ನಿರ್ಮಲಚಿತ್ತ ಗೋವಿಂದ ।
ನಿಗಮಗೋಚರ ಮುಕುಂದ ॥
ಜ್ಞಾನಿಗಳರಸ ನೀನಲ್ಲದೆ ಜಗಕಿನ್ನು ।
ಮಾನದಿಂದಲಿ ಕಾವ ದೊರೆಗಳ ನಾ ಕಾಣೆ ॥

ದಾನವಾಂತಕ ದೀನಜನಮಂದಾರನೆ ।
ಧ್ಯಾನಿಪರ ಮನಸಂಚಾರನೆ ।
ಮೌನವಾದೆನು ನಿನ್ನ ಧ್ಯಾನಾನಂದದಿ ಈಗ ।
ಸಾನುರಾಗದಿ ಕಾಯೋ ಸನಕಾದಿವಂದ್ಯನೆ ॥೧॥

ಬಗೆಬಗೆಯಲಿ ನಿನ್ನ ಸ್ತುತಿಪೆನೋ ನಗಧರ ।
ಖಗಪತಿವಾಹನನೆ ।
ಮಗುವಿನ ಮಾತೆಂದು ನಗುತ ಕೇಳುತ ಬಂದೆ ।
ಬೇಗದಿಂದಲಿ ಕಾಯೋ ಸಾಗರಶಯನನೆ ॥೨॥

ಮಂದರಧರ ಅರವಿಂದಲೋಚನ ನಿನ್ನ ।
ಕಂದನೆಂದೆಣಿಸೊ ಎನ್ನ ।
ಸಂದೇಹವೇಕಿನ್ನು ಸ್ವಾಮಿ ಮುಕುಂದನೆ ।
ಬಂದೆನ್ನ ಕಾಯೋ ಶ್ರೀಪುರಂದರವಿಠಲ ॥೩॥

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चक्की चल रही

Tuesday, 23 July 2013

साहित्य - कबीर


चक्की चल रही, कबीरा बैठा रोयी
दोनो पुड़ के बीच में साझा ना निकले कोयी ।
चक्की चल रही, कबीरा बैठा जोयी
खूंटा पकड़ो निज नाम का, तो साझा निकले जो सोयी ॥

छोड़ के मत जाअो एकली रे
बंजारा रे बंजारा रे ।
दूर देस रहे मामला
अब जागो प्यारा रे ॥

अपना साहेब ने महल बनायी, बंजारा रे, बंजारा रे ।
गहरी गहरी माहे बीन बजायी, बंजारा हो ॥१॥

अपना साहेब ने बाग़ बनायी, बंजारा रे, बंजारा रे ।
फूल भरी लायी छाब रे, बंजारा हो ॥२॥

कहत कबीरा धर्मीदास को ।
संत अमरापुर मालना, बंजारा रे ॥३॥

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तोडि - भवानी जगत जननी

Tuesday, 2 July 2013

रचना - तानसेन
राग - तोडि
ताल - द्रुत एकताल


स्थायी
भवानी जगत जननी
दायिनी सुख कारिनी (/ धारिनी दुःख हारिनी)
मुझको तू आधार ॥

अंतरा
स्मरत तव चरण युगल
पाप ताप शमन होत
'तानसेन' गात नाम
दिवस यामिनी ॥

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तोडि - तान कपतान जिन बंदिये

राग - तोडि
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
तान कपतान जिन बंदिये
जग मे फ़तेह अली ख़ान ॥

अंतरा
तान के कपतान
जग मे बंदे अली ख़ान
मेहरबान सुर के ॥

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तोडि - चंगे नैनवालिया

रचना - नियामत ख़ान 'सदारंग'
राग - तोडि
ताल - विलंबित एकताल


स्थायी
चंगे नैनवालिया कुड़िया
'सदारंग'नू देंदिया सेनत ॥

अंतरा
मुख चंदा सा और गुलबदनिया
मुख से बनावत बेन ॥

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मियाँ मल्हार - उमड़ घुमड़ घन गरजे बदरा

Sunday, 16 June 2013

राग - मियाँ मल्हार
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
उमड़ घुमड़ घन गरजे बदरा
कारे का अत ही मोरी डरी
अदी अदी खली खली मा रूम झूम ॥

अंतरा
उमड़ घुमड़ घन गरजे बदरा
चमक चमक चमके बिजलिया
चलत पवन पुरमाये रूम झूम ॥


लिपिबद्ध स्वर
X 0
ऩी सा रे सा ऩी सा ऩी ध̣
ड़ घु ड़
म̣ प̣ ऩी ध̣ ऩी ऩी सा S सा S रे सा रे
जे S रा S का S रे S का S S S
रे रे S रे रे नी
ही मो S री री दी दी ली ली
S S S रे सा सा
मा S S रू S झू
नी
ड़ घु ड़
नी नी नी सां S नी नी नी नी सां नी सां
जे S रा S
नीसां रें नी सां नी नी रे रे
के S बि S लि या S पु
नीनी सां S रे सा
मा S ये रू S झू

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पंढरी निवासा सख्या पांडुरंगा

Saturday, 8 June 2013

साहित्य-नामदेव


पंढरी निवासा सख्या पांडुरंगा ।
करी अंग संगा, भक्‍ताचिया ॥

भक्‍त कैवारीया होसी नारायणा ।
बोलता वचन काय लाज ॥१॥

मागे बहुतांचे फेडियले ऋण ।
आम्हासाठी कोण आली धाड ॥२॥

वारंवार तुज लाज नाही देवा ।
बोल रे केशवा म्हणे नामा ॥३॥

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तोडि - लंगर कांकरिया जी ना मारो

Friday, 7 June 2013

राग - तोडि
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
लंगर कांकरिया जी ना मारो मो पे
अंगवा लग जावे ॥

अंतरा
सुन पावे मोरी सास ननदिया
दौड़ी दौड़ी चला आवे ॥

लिपिबद्ध स्वर
X 0
म́ म́
लं
S म́ S रे रे सा सा
कां S रि या S जी ना मा S रो S S मो S पे
सा रे S म́ म́ म́ रे रे
अं वा S S S जा S S वे S
म́ म́ S म́ सां S सां सां नी रें सां सां
सु S वे S मो री सा S दि या S
सांरें गं रें सां S सां नी सां नी S नी
दौ S ड़ी दौ S ड़ी S S वे S

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तोडि - गरवा मैं संग लागी

Thursday, 6 June 2013

राग - तोडि
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
गरवा मैं संग लागी
लागी रे मीत पिहरवा
आनंद भयिलवा मोरे मंदिरवा ॥

अंतरा
सगरी रैन मोरे जागत बीती
भोर भयी सनपाली आवे
फुलवन सेज बिछा मोरे अंगना
रैस रैस घर जाओ पिहरवा ॥

लिपिबद्ध स्वर
X 0
सा सा रे रे S सा ऩी
वा S मै S सं
सा S सा S S S S S S S म́ S
ला S गी S S S S S ला S गी S रे S S S
धम́ धम́ रे रे रे सा S सा सा सा सा ऩी सा ध̣ S
मी S पि वा S नं यि वा S
S रे रे रे सा S
मो S रे मं दि वा S
म́ म́ S म́
री रै S मो रे
सां S सां सां नी रें सां सां नी S नी नी सां S सां रें
जा S बी S ती S भो S यी S
नी सां रें रें नी S S नी नी S
पा S S ली S वे S फु से S बि
म́प म́ रे रे सा सांरें गं गं रें S सां नी सां
छा S मो रे अं ना S रै S रै S
S रे रे सा
जा S पि वा S

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मारवा - लायी रे श्याम हमरे दूरिया

Wednesday, 5 June 2013

राग - मारवा
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
लायी रे श्याम हमरे दूरिया
मैं कैसे लाऊँ जल के गगरिया ॥

अंतरा
बाट घाट सब रोकत टोकत
अब ना रहूँगी मैं तोरी डगरिया ॥

लिपिबद्ध स्वर
x 0
म́ म́ध म́ध म́ग रे सा सा
ला यी रे S S श्या S
ऩीरे सा ऩी ध̣ ऩी ऩी रे S ऩी S रे S S म́
रे S दू रि या S मैं S कै S से S ला ऊँ
म́ध म́ग रे म́ध
के रि या S
म́ S S म́ नी
बा S घा S
सां S सां सां नी रें सां सां नी रें नी रें नी S S
रो S टो S ना हूँ S गी S
म́ म́ध म́ग रे म́ध
मैं तो री रि या S

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मियाँ मल्हार - अत धूम धूम धूम

Tuesday, 4 June 2013

रचना - क़ुतुब बक्ष 'तानरस ख़ान'
राग - मियाँ मल्हार
ताल - द्रुत एकताल


स्थायी
अत धूम धूम धूम
अत आयी बदरीया
उमड़ घुमड़ गरज गरज
बरसन को लागी ॥

अंतरा
पी पी करत पपीहा
तरसन लागे मोरा जियरा
'तानरस ख़ान'
ओ मोरे डिंगवा ॥

लिपिबद्ध स्वर
x 0 0
रे
ऩी S ध̣ ऩी S ऩी सा S सा S ऩी
धू S धू S धू S S
रे S S रे S सा रे
S S यी S रि या S
नी नी सां नी सां नी सां
ड़ घु
नी रें सां नी रे S सा S
को S S गी S
S S नी नी सां नी सां S
पी S पी S पी S हा S
नी नी सां सां नीरें सां S नी
ला गे मो रा S जि रा
S रे नी नी नी सां S
- ता S ख़ा S आS S S
रें सां नी रे सा S S
- मो रे डिं वा S S S

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तोडि - दय्याँ बट डूबर भयी

रचना - नियामत ख़ान 'सदारंग'
राग - तोडि
ताल - विलंबित एकताल


स्थायी
दय्याँ बट डूबर भयी
मैं का लंगरवा भरन देत ना गगरिया ॥

अंतरा
कैसे मैं जाऊँ विहान तोरे संग री सजनी
प्रीतम ठाड़ो ‘सदारंग’ उचकैय्या ॥

Pandit Ramasheya Jha 'Ramarang' version that has the sam on the pancham

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भैरव - बालमवा मोरे सैय्याँ

रचना - नियामत ख़ान 'सदारंग'
राग - भैरव
ताल - विलंबित एकताल


स्थायी
बालमवा मोरे सैय्याँ 'सदारंगीले' ॥

अंतरा
हूँ तो तुम बिन तरस गयीली
दरस बेग दिखाओ
ले हो बलय्याँ ॥

Pandit Dr.Nagaraja Rao Havaldar performs :

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भैरव - नाम करी मैं तो

राग - भैरव
ताल - विलंबित झपताल


स्थायी
नाम करी मैं तो
लेत मन भोरी
तब होवे निस्तार
दोवू जगत में ॥

अंतरा
कैसे हो मूँ से काला
आशा करत होवे
सिवा उसके और कौन
दोवू जगत में ॥

लिपिबद्ध स्वर
x 0
मग मग मप
ना S S री S मैं S तो
रे रे रे सा रे रे रे सा
ले S भो S S S री
सा रे नी नी सां
हो S वे नि S स्ता S
सांध धनीसां मप मग मग मप
दो S वू S में S S
नी नी सांनी सांनी सांसां
कै S से S हो मूँ से का S ला
सां नीनी सांनी सां रें नी सां
S शा S हो S वे
मग मग नी नी सां
सि वा S स्के कौ S
सांध धनीसां मप मग मग मप
दो S वू S में S S

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भैरव - जागो मोहन प्यारे

राग - भैरव
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
जागो मोहन प्यारे तुम
साँवरी सूरत तोरा मन ही भावे
सुंदर श्याम हमारे॥

अंतरा
प्रातः समय उठी भानोदय भयो
ग्वाल बाल सब भूपती आवे
तुम्हरे दरसवा को द्वारे ठाड़े
उठी उठी नंदकिशोर ॥

लिपिबद्ध स्वर
x 0
जा S गो S मो S
रे
प्या S रे S S S तु साँ री सू तो रा
रे रे S सा S ऩी सा
ही S भा S वे S सुं S श्या S
सां सां मप मग
मा S S S S S रे S
प्रा S तः ठी
सां सां सां सां सां नी रे सां सां नी नी नी नी रे सां
भा S नो S यो ग्वा S बा S
सां सां नी सां नीसां रेंसां नी
भू S ती S वे S तु म्ह रे वा को
रे रे रे सा सा ऩी सा
द्वा S रे S ठा S ड़े S ठी ठी नं S कि
सां सां मप मग
शो S S S S S S


Pandit Dr.Nagaraja Rao Havaldar performs (drut khayal begins 22:10):

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भैरव - तोरे नगरिया चल बसिया पिया

राग - भैरव
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
तोरे नगरिया चल बसिया पिया
बाबुल के देस ना रहूँगी ॥

अंतरा
जो हम से कछु भूल भयो है
राखूँगी अपनी साथ
सास ननद की गारी सहूँगी॥

लिपिबद्ध स्वर
x 0
सा S
तो रे S रि या S
रे रे सा S सा S S S
सि या S पि या बा S बु के S दे S
गम रे S सा S
ना S S हूँ S गी S
S S
जो S से S छु
सां सां सां सां नी रें सां S S S सां S सां सां
भू S यो S है S रा S खूँ S गी S
नी सां नी सां नीसां रेंसां सां
नी S S S सा S S सा S की S
गम रे S सा S
गा S री हूँ S गी S

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भैरव - धन धन मूरत कृष्ण मुरारी

रचना - विष्णु नारायण भातखंडे 'हररंग'
राग - भैरव
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
धन धन मूरत कृष्ण मुरारी
सुलछ्छन गिरिधारी
छबी सुंदर लागे अति प्यारी ॥

अंतरा
बँसीधर मनमोहन सुहावे
बली बली जाऊँ मोरे मन भावे
‘हररंग’ ग्यान बिचारी ॥

लिपिबद्ध स्वर
x 0
पम
मू S
रे S रे S सा S सा ध̣ S ऩी S ऩी सा सा
कृ S ष्ण मु रा S री S सु S छ्छ S गि रि
रे S सा S सा रे नी नी सां S
धा S री S बि सुं S ला S गे S ति
गम नीसां रेंसां नीसां नी मग
प्या S S S S S री S
S S नी नी
बं S सी S
सां सां सां सां नी रे सां S नी सां गं मं रे S सां S
मो सु हा S वे S ली ली जा S ऊँ S
नी धं नी सां धं S S S
मो रे भा S वे S रं ग्या S बि
गम पध नीसां रेंसां नीसां नीध मग
चा S S S S S री S

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ಕಾಯೋ ಕರುಣಾನಿಧೇ

Thursday, 7 March 2013

ಸಾಹಿತ್ಯ-ಮಹೀಪತಿದಾಸ


ಕಾಯೋ ಕರುಣಾನಿಧೇ ।
ಶ್ರೀಹರಿ ಖಗವರಗಮನ ॥

ಘೋರ ಸಂಸಾರದಿ ನಾ ಪರಿ ನೊಂದೆ ।
ವಾರಿ ಭವಭಯ ಅಘಕುಲಶಮನ ॥೧॥

ಗುರು ಮಹಿಪತಿ ಪ್ರಭೋ ಅನಾಥ ಬಂಧೋ ।
ಚರಣದ ಭಜನೆಯ ತಿಳಿಸೆನ್ನ ಮನ ॥೨॥

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शिवनामावल्याष्टकम्

Saturday, 2 March 2013

साहित्यम् - आदिशंकराचार्यः

हे चन्द्रचूड मदनांतक शूलपाणे स्थाणो गिरीश गिरजेश महेश शंभो ।
भूतेश भीतभयसूदन मामनाथम् संसारदुःखगहनाज्जगदीश रक्ष ॥१॥

हे पार्वतीहृदयवल्लभ चन्द्रमौले भूताधिप प्रमथनाथ गिरीशजाप ।
हे वामदेव भवरुद्र पिनाकपाणे संसारदुःखगहनाज्जगदीश रक्ष ॥२॥

हे नीलकंठ वृषभध्वज पञ्चवक्त्र लोकेश शेषवलय प्रमथेश शर्व ।
हे धूर्जटे पशुपते गिरिजापते माम् संसारदुःखगहनाज्जगदीश रक्ष ॥३॥

हे विश्वनाथ शिव शंकर देवदेव गंगाधर प्रमथनायक नंदिकेश ।
बाणेश्वराधिकरपो हर लोकनाथ संसारदुःखगहनाज्जगदीश रक्ष ॥४॥

वाराणसीपुरपते मणिकर्णिकेश वीरेश दक्षमखकाल विभो गणेश ।
सर्वज्ञ सर्वहृदयैकनिवास नाथ संसारदुःखगहनाज्जगदीश रक्ष ॥५॥

श्रीमन्महेश्वर कृपामय हे दयालो हे व्योमकेश शितिकंठ गणाधिनाथ ।
भस्मांगराज नृकपालकलापमाल संसारदुःखगहनाज्जगदीश रक्ष ॥६॥

कैलासशैलविनिवास वृषाकपे हे मृत्युञ्जय त्रिनयन त्रिजगन्निवास ।
नारायणप्रिय मदापह शक्तिनाथ संसारदुःखगहनाज्जगदीश रक्ष ॥७॥

विश्वेश विश्वभवनाशक विश्वरूप विश्वात्मक त्रिभुवनैकगुणाभिवेश ।
हे विश्ववन्द्य करुणामय दीनबन्धो संसारदुःखगहनाज्जगदीश रक्ष ॥८॥

गौरीविलासभवनाय महेश्वराय पञ्चाननाय शरणागतकल्पकाय ।
शर्वाय सर्वजगतामधिपाय तस्मै दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥

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ప్రెమ లేదని, ప్రేమించరాదని

Monday, 25 February 2013

సాహిత్యం-ఆత్రేయ
చిత్రం-అభినందన (౧౯౮౮)
సంగీతం-ఇళయరాజా
గానం-ఎస్.పి.బాలసుబ్రమణ్యం



ప్రెమ లేదని, ప్రేమించరాదని,
సాక్ష్యమే నీవని, నన్ను నేడు చాటనీ
ఓ ప్రియా జోహారులు ॥

మనసు మాసిపోతే మనిషే కాదని
కటికరాయికైనా కన్నీరుందని
వలపు చిచ్చు రగులుకుంటె ఆరిపోదని
గడియ పడిన మనసు తలుపు తట్టి చెప్పనీ
ఉసురుకప్పి మూగవోయి నీ ఉపిరి
మోడువారి నీడ తోడు లేకుంటిని ॥౧॥

గుఱుతు చేఱిపివేసి జీవించాలని
చెఱపలేకపోతే మరణించాలని
తెలిసికూడా చేయ్యలేని వెఱ్ఱివాడిని
గుండే పగిలిపోవువరకు నన్ను పాడనీ
ముక్కలలో లేక్కలేని రూపాలలో
మఱలమఱల నిన్ను చూసి రోదించనీ ॥౨॥

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दिल की ये आरज़ू थी कोई दिलरुबा मिले

Saturday, 5 January 2013

साहित्य - हसन कमाल
संगीत - रवि
चित्रपट-निकाह
गायन - महेन्द्र कपूर, सल्मा आघा


म: दिल की यह आरज़ू थी कोई दिलरुबा मिले
लो बन गया नसीब के तुम हम से आ मिले

स: देखें हमें नसीब से अब, अपने क्या मिले
अब तक तो जो भी दोस्त मिले, बेवफ़ा मिले

म: आँखों को एक इशारे की ज़हमत तो दीजिये
कदमों में दिल बिछादूँ इजाज़त तो दीजिये
ग़म को गले लगालूँ जो ग़म आप का मिले
दिल की यह आरज़ू थी कोई दिलरुबा मिले

स: हम ने उदासियों में गुज़ारी है ज़िन्दगी
लगता है डर फ़रेब-ए-वफ़ा से कभी कभी
ऐसा न हो कि ज़ख़्म कोई फिर नया मिले
अब तक तो जो भी दोस्त मिले बेवफ़ा मिले

म: कल तुम जुदा हुए थे जहाँ साथ छोड़ कर
हम आज तक खड़े हैं उसी दिल के मोड़ पर
हम को इस इन्तज़ार का कुछ तो सिलह मिले
दिल की यह आरज़ू थी कोई दिलरुबा मिले

स: देखें हमें नसीब से अब, अपने क्या मिले
अब तक तो जो भी दोस्त मिले, बेवफ़ा मिले

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फ़ज़ा भी है जवाँ जवाँ

साहित्य - हसन कमाल
संगीत - रवि
चित्रपट-निकाह


फ़ज़ा भी है जवाँ जवाँ, हवा भी है रवाँ रवाँ ।
सुना रहा है ये समा सुनी सुनी सी दास्ताँ ॥

पुकारते हैं दूर से, वो क़ाफ़िले बहार के ।
बिखर गये हैं रंग से, किसीके इन्तज़ार के ।
लहर लहर के होंठ पर, वफ़ा की हैं कहानियाँ ॥१॥

बुझी मगर बुझी नहीं, न जाने कैसी प्यास है ।
क़रार दिल से आज भी न दूर है न पास है ।
ये खेल धूप छाँव का, ये कुर्बतें ये दूरियाँ ॥२॥

हर एक पल को ढूँढता, हर एक पल चला गया ।
हर एक पल फ़िराक़ का, हर एक पल विसाल का ।
हर एक पल गुज़र गया, बनाके दिल पे इक निशाँ ॥३॥

वही घड़ी वही पहर, वही हवा वही लहर ।
नई हैं मंज़िलें मगर, वही डगर वही सफ़र ।
नज़र गई जिधर जिधर, मिली वही निशानियाँ ॥४॥

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बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी

साहित्य - हसन कमाल
संगीत - रवि
चित्रपट-निकाह


अभी अलविदा मत कहो दोस्तों
न जाने फिर कहाँ मुलाक़ात हो
क्योंकि ...

बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी ।
ख़्वाबों में ही हो चाहे मुलाक़ात तो होगी ॥

यह प्यार मे डूबी हुयी रँगीन फ़ज़ायें ।
यह चहरें यह नज़रें यह जवाँ रुत यह हवायें ।
हम जाये कहीं इनकी महक साथ तो होगी ॥१॥

फूलों की तरह दिल में बसाये हुए रखना ।
यादों के चिराग़ों को जलाये हुए रखना ।
लम्बा है सफ़र इस में कहीं रात तो होगी ॥२॥

यह साथ गुज़ारे हुए लम्हात की दौलत ।
जज़्बात की दौलत यह ख़यालात की दौलत ।
कुछ पास न हो पास यह सौग़ात तो होगी ॥३॥

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दिल के अरमाँ आँसुओं में बह गये

साहित्य - हसन कमाल
संगीत - रवि
चित्रपट - निकाह
गायन - सल्मा अाघा


दिल के अरमाँ आँसुओं में बह गये ।
हम वफ़ा करके भी तनहा रह गये ॥

ज़िंदगी एक प्यास बनकर रह गयी ।
प्यार के क़िस्से अधूरे रह गये ॥१॥

शायद उनका आख़्ररी हो यह सितम ।
हर सितम यह सोचकर हम सह गये ॥२॥

ख़ुद को भी हमने मिटा डाला मगर ।
फ़ासले जो दरमियाँ थे रह गये ॥३॥

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ದೀಪವು ನಿನ್ನದೆ ಗಾಳಿಯು ನಿನ್ನದೆ

Wednesday, 2 January 2013

ಸಾಹಿತ್ಯ - ಕೆ.ಎಸ್.ನರಸಿಂಹಸ್ವಾಮಿ
ಸಂಕಲನ - ಮೈಸೂರು ಮಲ್ಲಿಗೆ
ಸಂಗೀತ - ಸಿ.ಅಶ್ವಥ್
ಆಧಾರಿತ ರಾಗ - ದಿನ್-ಕಿ-ಪೂರಿಯಾ


ದೀಪವೂ ನಿನ್ನದೆ ಗಾಳಿಯೂ ನಿನ್ನದೆ, ಆರದಿರಲಿ ಬೆಳಕು।
ಕಡಲೂ ನಿನ್ನದೆ ಹಡಗೂ ನಿನ್ನದೆ, ಮುಳುಗದಿರಲಿ ಬದುಕು ॥

ಬೆಟ್ಟವೂ ನಿನ್ನದೆ ಬಯಲೂ ನಿನ್ನದೆ, ಹಬ್ಬಿ ನಗಲಿ ಪ್ರೀತಿ ।
ನೆಳಲೋ ಬಿಸಿಲೋ, ಎಲ್ಲವೂ ನಿನ್ನದೆ, ಇರಲಿ ಏಕರೀತಿ ॥೧॥

ಆಗೊಂದು ಸಿಡಿಲು ಈಗೊಂದು ಮುಗಿಲು, ನಿನಗೆ ಅಲಂಕಾರ ।
ಅಲ್ಲೊಂದು ಹಕ್ಕಿ ಇಲ್ಲೊಂದು ಮುಗುಳು, ನಿನಗೆ ನಮಸ್ಕಾರ ॥೨॥

ಅಲ್ಲಿ ರಣದುಂದುಭಿ, ಇಲ್ಲೊಂದು ವೀಣೆ, ನಿನ್ನ ಪ್ರತಿಧ್ವನಿ ।
ಆ ಮಹಾಕಾವ್ಯ, ಈ ಭಾವಗೀತೆ, ನಿನ್ನ ಪದಧ್ವನಿ ॥೩॥

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