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यमन - धनिया धन धन देते रोहि

Friday, 17 June 2016

राग - यमन
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
धनिया धन धन देते रोहि,
शूल सुलभ नाहि ॥

अंतरा
धन धन बाको नैन में रबसे,
लाजर प्रीता साँवरिया ने,
जाने अंतर देते रोहि,
शूल सुलभ नाहि ॥

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शिवमत भैरव - तोरी बारी फूल

Thursday, 2 June 2016

राग - शिवमत भैरव
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
तोरी बारी फूल रही,
बरन बरन के फूलवा ॥

अंतरा
हूँ बल जाऊँ,
मोरे अंगना ॥

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बिहाग - सब सखियाँ चलो प्रभू के दरशन

Wednesday, 20 April 2016

राग - बिहाग
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
सब सखियाँ चलो प्रभू के दरशन,
धन धन भाग सुफल होत नयन ॥

अंतरा
सोला सिंगर सजो अत सुलझन,
कुसुम सुगंधित हररंग सुभ क्षण,
गिरिधर प्रभू के चरनन अरपण,
आज करो तन मन धन अरपण ॥

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बिहाग - टेर सुने पिया की आवन की

रचना - नियामत ख़ान 'सदारंग'
राग - बिहाग
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
टेर सुने पिया की आवन की,
सुध बिसरायी मेरे मन की ॥

अंतरा
जब ही मिलत मोरे आन ‘सदारंग’,
तब ही होत सखी मेरे मन की ॥

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बिहाग - कैसे सुख सोवे

रचना - नियामत ख़ान 'सदारंग'
राग - बिहाग
ताल - विलंबित एकताल


स्थायी
कैसे सुख सोवे नींदरिया,
श्याम सूरत चित चढ़ी ॥

अंतरा
सोय सोय ‘सदारंग’ अकुलाये,
या विधि गाँठ पड़ी ॥

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बिहाग - कवन ढंग तोरा सजनी

राग - बिहाग
ताल - विलंबित एकताल


स्थायी
कवन ढंग तोरा सजनी,
तू तो इतरात उतरात बीती जात ॥

अंतरा
छांड मान उठ ले हो बलैय्याँ,
सोत लगा रही घात ॥

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बागेश्री - कौन करत तोरी बिनत

राग - बागेश्री
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
कौन करत तोरी बिनत पियरवा,
मानो ना मानो हमरी बात ॥

अंतरा
जब से गयो मोरी सुध-बुध लीनी,
चाहे सौतन के घर जात ॥

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बागेश्री - ढूंढी ढूंढी बाट बाट

राग - बागेश्री
ताल - द्रुत एकताल


स्थायी
ढूंढी ढूंढी बाट बाट,
अमरय्यन की मोरे नंदलाल,
तोरे कारन ॥

अंतरा
थक गये अब हमरे पाँव,
रात हो गयी अपार,
सूझ बूझ तोरे न कैसे, का करूँ दय्या ॥

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बागेश्री - चलत चलत मथुरा नगरी में

राग - बागेश्री
ताल - द्रुत तीनताल


स्थायी
चलत चलत मथुरा नगरी में,
श्याम काम जिया में बसेरा,
नंद दिखाये छैला छबीला ॥

अंतरा
बिंदिराबन में फूल फुलेरा,
गोकुल का ये राज दुलारा ॥

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बागेश्री - बिनती सुनो मोरी

राग - बागेश्री
ताल - विलंबित झपताल


स्थायी
बिनती सुनो मोरी, अवधपुर के बसैय्या,
तुम बिन कवन मोरे, दुख के हरैय्या ॥

अंतरा
जहाँ जहाँ पऱी बीर, तहाँ तहाँ दियो धीर,
जानकी पती राम, भव के तरैय्या ॥

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